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Duniya Sabki Facilitation Experience

 

Aagaaz collaborated with Deepalya Community Library where four of our core group members from Hazrat Nizamuddin Basti co-facilitated their first theatre workshop. This resulted in a performance called ‘Duniya Sabki’. Nagina, Zainab, Jasmine and Nagma share their experiences of facilitation by answering some basic questions.How did they feel?

नगीना: यह एक बहुत अच्छा अनुभव था क्यूंकि पहली बार मैंने अपने से कम उम्र के बच्चो के साथ काम किया | Lead करना थोडा मुश्किल था लेकिन मैंने पहले भी कही और workshop किया है तो थोडा सा आसन भी था | मैंने बहुत मज़ा किया और बहुत कुछ सिखने को भी मिला |

ज़ैनब: अच्छा भी feel हुआ और थोडा बुरा भी | अच्छा इसलिए क्यूंकि first time facilitation किया था और बुरा इसलिए क्यूंकि दीपाल्या के बच्चो के साथ एक अच्छा relation बन गया था | बस ऐसा feel हो रहा था के हम पाँच दिन बाद उन्हें छोड़ न दे और उनसे हमेशा मिलते रहे |

जास्मीन: Deepalaya Community Library के बच्चो के साथ काम करके मुझे बहुत मज़ा आया क्यूंकि मुझे कई महीनो बाद ख़ुशी मिली थी | 25 February से ले कर March के 18 तारिख तक मेरे एग्जाम चल रहे थे जिस कारण मैंने अपनी खेल-कूद और मस्ती-मजाक बंद कर दिया था | 19 March से ले कर workshop के आखिरी दिन तक मुझे खूब मज़े आये क्यूंकि उन बच्चो के साथ काम कर के मुझे अपने आगाज़ के बच्चो की याद आ रही थी और थोड़े अपने बचपन की भी याद आ गयी | वो भी उतने ही शरारती है जितने हम | जैसा की आगाज़ में मै, ज़ैनब और सद्दाम मस्ती करते है वैसे ही दीपालय के बच्चे दीपक, तुषार और प्रिया कर रहे थे ! मुझे संयुक्ता, टॉम और प्रीया के जैसे कलाकार के साथ काम करके भी बहुत मज़ा आया | प्रीया हम सब को बहुत सारे body exercises और dance कराती थी और हम सब ने वो सब भी सीख लिया | पहली बार ऐसा था के हम दुसरे बच्चो को सिखा रहे थे और लगने लगा के अब में बड़ी हो गयी हूँ और वो feeling उस time दुगनी हो गयी जब वो मुझे Ma’am या दीदी कहते थे !

नगमा: जब में दीपालय पहुची तो वहाँ के बच्चे किताबे पढ़ रहे थे | फिर हमने एक दुसरे से बातें करी और games खेलकर एक दुसरे का नाम भी जाना | पाँच दिन नाटक बनाते-बनाते हम सब बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए जैसे हम आगाज़ group में है | मुझे workshop में बहुत अच्छा लगा |

What did they learn as a facilitator?

नगीना: अगर कोई facilitate करता है तो उसे सुनना बहुत ज़रूरी होता है, बिना सुने हम कोई काम नहीं कर सकते | जिस Group के साथ हम काम करते है उसमें गोपनीयता और trust का होना बहुत ज़रूरी है, उसके बिना group नहीं चल सकता है | और हर बार सिर्फ गुस्सा करना सही नहीं होता है और उससे काबू में रखना चाहिए ताकि हम गुस्सा वहाँ दिखा सके जहाँ पर उसकी असली ज़रुरत होती है | Facilitate करते करते याद आया के जब आगाज़ के बच्चो को facilitate करने के लिए कोई आता था तो उन पर गुस्सा करना, कभी बात न सुनना और आपस में बात करना शुरू कर देना, यह सब हम करते थे और अब जब खुद के साथ हुआ तब एहसास हुआ के हम दुसरे के साथ बहुत बुरा व्यवहार करते थे | और भी बहुत बातें सीखी हमने जैसे की workshop के दौरान हमारा ध्यान सिर्फ ग्रुप पर होना चहिये, time का ध्यान रखना चहिये और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिससे आपसी संबंध बिगड़े |

ज़ैनब: थोड़ी मुश्किल हुई और समझ आया के जब कोई facilitate करता है तो कितनी थकावट हो जाती है | मैंने patience रखना सिखा | जब बच्चे सुनते नहीं है और परेशान करते है तो उनको ना मारकर, अपने गुस्से को थोडा control करके काम करना | एक ही Group में लोगो के ideas अलग-अलग हो सकते है तो important है उनको match करते हुए चलना | और ज़रूरी है के different types के activities कराना ताकि सबका interest बने रहे और काम करने में मज़ा आये | मैंने यह भी सिखा के बच्चो को अच्छे से समझाया जाए ताकि वो अच्छे से सब कुछ कर सके | Objective सोच कर जाना भी important है जैसे के हम सोच कर गए थे के workshop के end तक एक play बनाना है पर साथ ही साथ और भी चीज़े करनी चाहिए जैसे games खिलवाना | एक और बात के सिर्फ अपने ideas के बारे में ना सोचना पर बच्चो के ideas भी catch करने चाहिए |

जास्मीन: मुझे सबसे पहले सीख मिली के किसी भी workshop को करते समय सबसे पहले आपस में मेल-झोल और भरोसा बनाना पड़ता है ताकि अगर हम अपनी personal बातें share करे तो हमे लोगो पर trust होना चाहिए | दूसरी बात यह की अगर किसी बच्चे से acting नहीं हो रही है तो उस पर गुस्सा नहीं करना चाहिए और बुरे शब्द इस्तेमाल नहीं करने चाहिए क्यूंकि अगर हम ऐसा करेंगे तो वो बच्चा घबरा जायेगा और सिखने के बजाय उसके मन में ‘मुझसे कुछ नहीं होगा’ जैसी negative सोच आने लग जाएगी | एक बात और सीखी के हमारा सुनना बहुत ज़रूरी है | हम अगरworkshop में अपनी बातो में खोये रहेंगे तो जो बातें चल रही है वो नहीं सुन पाएंगे और फिर बाकी लोगो से पूछते रहेंगे के क्या बोला किसने | आगाज़ में भी ऐसा हो जाता है और जब दीपालय में कुछ बच्चो ने हमारी बात नहीं सुनी तब समझ में आया के जब हम ने अपने facilitator की बातें नहीं सुनी होंगी तो उनको गुस्सा ज़रूर आता होगा | Workshop में हम सिर्फ सिखाते ही नहीं पर बहुत कुछ खुद सीख भी जाते है |

नगमा: मैंने सीखा के बच्चो के साथ काम करते समय बुरे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और डाटना और चिल्लाना भी नहीं चाहिए | Patience रख कर ही काम अच्छे से हो सकता है |

What did they do well and what could they have done better, as a facilitator?

नगीना: क्यूंकि जिन बच्चो के साथ काम किया वो उम्र में मुझसे अलग थे तो उनकी thinking भी अलग थी और as a facilitator मुझे उनकी thinking को साथ में चलना ज़रूरी था जो की मैंने किया | लेकिन एक बात मुझे ध्यान रखनी है के Workshop के दौरान मुझे ज्यादा energy के साथ groups में काम कराना चाहिए |

ज़ैनब: मेरे group में जो बच्चे थे उन में से कई बच्चो के roll-fit नहीं हो पा रहे थे | हर कोई हर चीज़ नहीं कर पाता था या कर भी लेता था तो मुझे ऐसा लगा के मैंने कई बच्चो को गलत roll दे दिए | पर अच्छी बात यह रही के हमने हार नहीं मानी और उन्होंने कोशिश करी और अपना roll अच्छे से कर के दिखाया | अगली बार जब में फिर facilitate करुँगी तो ध्यान रखूंगी के बहुत सारी interesting activities पहले से सोच कर जाऊ क्यूंकि कई बार ऐसा हुआ के मुझे group में interest बढ़ाना था और मेरे दिमाग में कुछ activities ही नहीं आ रही थी |

जास्मीन: मैंने facilitator के तरह से यह अच्छा किया के बच्चो को सही तरह से dialogues बोलने का तरीका बताया जैसे के हमे जल्दी जल्दी नहीं बोलना चाहिए acting करते time. मुझे लगता है के अगर में पहले से उस group में होती तो में उन बच्चो के बारे में अच्छी तरह जानकर उनके साथ और अच्छे तरीके से काम कर सकती थी |

नगमा: में बच्चो के साथ दोस्त बन कर रही और अगर उनको कुछ नहीं समझ नहीं आता था तो में उनको और बता कर या खुद वो चीज़ कर के दिखाती थी | उनको नाटक के गाने याद करवाने में और गाने में भी मैंने उनकी बहुत मदद करी |

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